PM Surya Ghar Yojna — Uttar Pradesh | सरकारी सब्सिडी के साथ अपने घर पर सोलर सिस्टम लगवाएं
अपनी ज़रूरत के अनुसार सही सोलर सिस्टम चुनें
स्टैंड अलोन सिस्टम जो बैटरी में पावर स्टोर करता है। बिजली कट होने पर भी काम करता है। सरकार इस पर सब्सिडी नहीं देती।
ग्रिड टाई सिस्टम — बैटरी नहीं, सीधा ग्रिड से कनेक्ट। नेट मीटर के ज़रिए अतिरिक्त बिजली ग्रिड को भेजें और बिल बचाएं।
ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड दोनों के फायदे। बैटरी बैकअप के साथ एक्सपोर्ट सुविधा। थोड़ा महंगा but सबसे स्मार्ट विकल्प।
PM Surya Ghar Yojna के तहत मिलने वाली सब्सिडी
| Project Rating | Central Subsidy | Total Subsidy |
|---|---|---|
| 1kW On-Grid Solar Inverter | ₹30,000 | ₹30,000 |
| 2kW On-Grid Solar Inverter | ₹60,000 | ₹60,000 |
| 3kW or above On-Grid Solar Inverter | ₹78,000 | ₹78,000 |
साधारण vs उचित — जानिए क्यों AJS Dynamic Solar बेहतर है
जैसे सभी करते हैं — आपकी छत पर सामान्य साइट सर्वे। छाया और संरचना की गहन जाँच नहीं।
Pre-GI पाइप काटकर लगा दिए जाते हैं। 2-3 साल में जंग लगने लगता है। तेज़ हवा में पैनल उड़ सकते हैं।
Pre GI स्ट्रक्चर शुरुआत के दो साल सही चल जाता है। बाद में तेज़ हवा से सोलर पैनल उड़ भी सकते हैं।
साधारण वायर और पाइप का उपयोग। खुली धूप में जल्दी खराब हो जाता है।
कुछ लोकल इंस्टालर इसमें साधारण वायर इस्तेमाल करते हैं।
केवल 2 अर्थिंग — बिजली के झटकों का खतरा बना रहता है।
37 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सर्वे। 3D डिज़ाइन के साथ सटीक सोलर जनरेशन और स्ट्रक्चर सेफ्टी सुनिश्चित।
हॉट डिप गैल्वनाइज़्ड स्ट्रक्चर। 25 साल की लाइफ। 160 किमी/घंटा हवा तक टेस्टेड।
हॉट डिप स्ट्रक्चर 160 किमी/घंटा की तेज़ हवा तक के लिए टेस्टेड है। पूरी तरह सुरक्षित।
HDPE पाइप के साथ आर्मर्ड केबल। 10 साल की वारंटी। UV प्रोटेक्टेड और टिकाऊ।
AJS Dynamic Solar की इंस्टालेशन में सिर्फ Armoured केबल इस्तेमाल होती है।
कड़कती बिजली से बचाव के लिए ऊर्जा सोलर उचित अर्थिंग करता है।
✦ दिन में: सोलर पैनल से पंखा, लाइट, टीवी, फ्रिज — सब चलता है। जो बिजली बचती है, वह बैटरी में जमा हो जाती है।
✦ शाम को: सोलर बंद हो जाए, तो बैटरी वाली बिजली से घर चलता रहता है। कोई टेंशन नहीं।
✦ ज़रूरी बात: बैटरी खत्म होने पर आप ग्रिड से भी ले सकते हैं। इस सिस्टम पर सरकार सब्सिडी नहीं देती।
✦ बैटरी नहीं: इसमें बैटरी नहीं लगती। जब सूरज है, तब सोलर चलेगा। बिजली गई तो यह भी बंद हो जाएगा।
✦ बिल बचत: दिन में जितनी बिजली बनती है, उतनी ही घर में खर्च हो जाती है — बिजली का बिल ₹0 पर आ जाता है।
✦ अतिरिक्त बिजली: अगर ज़्यादा बिजली बन गई, तो वह नेट मीटर से होते हुए सरकारी लाइन (ग्रिड) में चली जाती है। जैसे कंपनी को उधार दे दी।
✦ वापस लेना: जब सोलर कम बनाए (बादल, सुबह-शाम), तब वही बिजली वापस ले सकते हैं। जहाँ लाइट कट कम हो वहाँ यह सिस्टम सबसे अच्छा है। सरकार 60% तक सब्सिडी देती है।
✦ दोनों का फ़ायदा: यह ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड — दोनों की तरह काम करता है। बैटरी भी है, नेट मीटर भी है।
✦ बिजली गई → बैटरी से काम: लाइट चली जाए तो बैटरी से घर चलता रहेगा। कोई अँधेरा नहीं।
✦ ज़्यादा बिजली → ग्रिड को भेजो: जब बैटरी फुल हो और सोलर ज़्यादा बना रहा हो, तो अतिरिक्त बिजली ग्रिड को जाती है — बिल और घटता है।
✦ नुकसान: यह सिस्टम थोड़ा महँगा होता है। लेकिन जहाँ कट अधिक हो और सब्सिडी भी चाहिए, वहाँ यही बेस्ट है।
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